बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ (Battle of Galwan) का टीज़र रिलीज होते ही चीन के सरकारी भोंपू ‘ग्लोबल टाइम्स’ (Global Times) की नींद उड़ गई है। फिल्म अप्रैल 2026 में रिलीज होनी है, लेकिन बीजिंग में अभी से बेचैनी साफ देखी जा सकती है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र, जो अक्सर अपनी प्रोपेगेंडा फिल्मों के जरिए चीनी सेना का महिमामंडन करता है, अब एक भारतीय फिल्म को “तथ्यों से परे” और “अतिशयोक्तिपूर्ण” बताकर खारिज करने की कोशिश कर रहा है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर एक फिल्म के ट्रेलर मात्र से ड्रैगन इतना डरा हुआ क्यों है? जवाब गलवान घाटी की उस बर्फीली रात में छिपा है, जिसके सच को चीन पिछले 5 सालों से दबाने की कोशिश कर रहा है।
ग्लोबल टाइम्स की बौखलाहट: ‘कहानी’ से डर या ‘सच’ से ?
सोमवार को ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख प्रकाशित कर आरोप लगाया कि बॉलीवुड फिल्म में भारतीय सैनिकों को ‘अजेय’ दिखाया गया है और इतिहास को बदला जा रहा है। चीनी विशेषज्ञों ने इसे “मनोरंजन से प्रेरित राष्ट्रवाद” करार दिया।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह प्रतिक्रिया उसकी असुरक्षा को दर्शाती है। चीन को डर है कि यह फिल्म दुनिया को विजुअल तरीके से दिखाएगी कि कैसे 15 जून 2020 को निहत्थे होने के बावजूद, कर्नल संतोष बाबू की अगुवाई में भारतीय जांबाज चीनी पीएलए (PLA) पर भारी पड़े थे। चीन ने दशकों तक अपनी सेना को ‘अजेय’ बताया है, लेकिन गलवान में बिहार रेजिमेंट के हाथों हुई उनकी दुर्गति उस मिथक को तोड़ती है।
सलमान खान और ट्रेलर पर ग्लोबल टाइम्स का निजी हमला
चीन की बेचैनी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्लोबल टाइम्स ने अब फिल्म की कहानी के बजाय अभिनेता सलमान खान पर निजी हमले शुरू कर दिए हैं। अखबार ने लिखा है कि सलमान, जिन्हें चीन में ‘बजरंगी भाईजान’ के लिए जाना जाता है, अक्सर पर्दे पर ऐसे किरदार निभाते हैं जो ‘अवास्तविक’ और ‘अजेय’ लगते हैं। चीनी मुखपत्र ने फिल्म के ट्रेलर में दिखाए गए दृश्यों को ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ की नकल बताते हुए इसका मजाक उड़ाने की कोशिश की है। लेख में सैनिकों के हेयरस्टाइल, कॉस्ट्यूम और लद्दाख की भीषण ठंड के चित्रण पर भी सवाल उठाए गए हैं। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि फिल्म की तकनीकी कमियों को गिनवाना और अभिनेता को ट्रोल करना चीन की एक सोची-समझी चाल है, ताकि दुनिया का ध्यान फिल्म में दिखाए जाने वाले उस कड़वे सच से हटाया जा सके, जिसमें भारतीय सेना ने पीएलए को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।
4 बनाम 45: आंकड़ों का खेल और चीन का झूठ
ग्लोबल टाइम्स अपने लेख में बार-बार दावा करता है कि गलवान संघर्ष में भारत ने उकसावे की कार्रवाई की और चीन ने ‘संयम’ बरता। चीन आज भी आधिकारिक तौर पर दावा करता है कि उस संघर्ष में उसके केवल 4 सैनिकों की मौत हुई थी।
हालांकि, दुनिया की कई स्वतंत्र जांच एजेंसियों ने चीन के इस दावे की धज्जियां उड़ा दी हैं:
- द क्लैक्सन (ऑस्ट्रेलियाई रिपोर्ट): खोजी पत्रकारिता समूह ‘द क्लैक्सन’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अंधेरे में मची भगदड़ और भारतीय सैनिकों के पलटवार के कारण कम से कम 38 से 45 चीनी सैनिक गलवान नदी के तेज बहाव में बह गए थे या मारे गए थे।
- रूसी एजेंसी TASS और अमेरिकी इंटेलिजेंस: फरवरी 2021 में रूसी समाचार एजेंसी TASS ने भी यह खुलासा किया था कि चीनी पक्ष के 45 सैनिक मारे गए थे।
- चीन की देरी: भारत ने घटना के तुरंत बाद अपने 20 शहीदों को सम्मान दिया, जबकि चीन को अपने 4 सैनिकों के नाम कबूलने में ही 8 महीने लग गए। यह देरी साबित करती है कि चीन अपनी जनता और पूरी दुनिया से भारी नुकसान को छिपा रहा था।
बॉलीवुड पर निशाना, खुद का प्रोपेगेंडा जारी
विडंबना यह है कि वही ग्लोबल टाइम्स बॉलीवुड पर उंगली उठा रहा है, जिसका देश ‘द बैटल एट लेक चांगजिन’ (The Battle at Lake Changjin) जैसी फिल्में बनाता है, जिसमें इतिहास को तोड़-मरोड़ कर चीनी सेना को महानायक बताया जाता है। जब भारत अपने नायकों की गाथा स्क्रीन पर ला रहा है, तो बीजिंग इसे “तनाव भड़काने वाला” बता रहा है।
संक्षेप में समझें
‘बैटल ऑफ गलवान’ फिल्म कैसी होगी, यह 2026 में पता चलेगा। लेकिन ग्लोबल टाइम्स की यह तीखी प्रतिक्रिया यह साबित करती है कि गलवान का घाव चीन को अभी भी साल रहा है। वह जानता है कि चाहे वह कितने भी लेख लिख ले, दुनिया यह जान चुकी है कि उस रात भारतीय सेना के 20 वीरों ने 40 से ज्यादा चीनी सैनिकों को यमलोक पहुंचाकर अपनी मातृभूमि की रक्षा की थी।
