भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में भारत अपने सबसे घातक और गेम-चेंजर हथियार- ‘ध्वनि’ (Dhvani) हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) का पहला उड़ान परीक्षण करने जा रहा है।
यह केवल एक मिसाइल टेस्ट नहीं, बल्कि भारत के ‘महाशक्ति’ बनने के दावे पर एक निर्णायक मुहर होगी। यह परीक्षण भारत को अमेरिका, रूस और चीन के उस बेहद छोटे और एलीट क्लब में शामिल कर देगा, जिनके पास ‘अदृश्य’ और ‘अजेय’ हाइपरसोनिक तकनीक है।
प्रोजेक्ट ‘ध्वनि’: प्रमुख विशेषताएं और क्षमताएं (सूत्रों के अनुसार)
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘ध्वनि’ दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम का ‘काल’ बनकर उभरने वाला है। इसकी विशेषताएं इसे मौजूदा मिसाइल डिफेंस और रडार नेटवर्क के लिए “अनट्रैकेबल” (जिसे ट्रैक न किया जा सके) बनाती हैं:
- बूस्ट-ग्लाइड प्रोफाइल: यह एक पारंपरिक मिसाइल नहीं है। एक रॉकेट बूस्टर इसे अंतरिक्ष के किनारे तक ले जाएगा, जहाँ से अलग होकर यह वायुमंडल में हाइपरसोनिक गति से ग्लाइड करेगा।
- शार्प मैन्युवरेबिलिटी: ग्लाइड चरण में यह तेज़ और अप्रत्याशित मोड़ ले सकता है, जिससे इसे मार गिराना लगभग असंभव हो जाता है।
- एडवांस्ड थर्मल प्रोटेक्शन: वायुमंडल में घर्षण से पैदा होने वाली भीषण गर्मी को झेलने के लिए इसमें सिरेमिक और हाई-एंड कंपोज़िट मटीरियल का कवच लगा है।
- स्पीड और रेंज: तकनीकी आकलनों के अनुसार, इसकी गति मैक-6 (ध्वनि से 6 गुना तेज़) या उससे अधिक होगी। शुरुआती रेंज 1,500 किलोमीटर से अधिक मानी जा रही है।
- ड्यूअल-रोल पेलोड: यह परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम होगा।

विश्लेषण: आखिर क्या है ‘हाइपरसोनिक मिसाइल’ और यह इतनी घातक क्यों है?
साधारण शब्दों में, हाइपरसोनिक का मतलब है—ध्वनि की गति (Speed of Sound) से कम से कम 5 गुना तेज़ चलना, यानी मैक-5 (Mach 5) या उससे ऊपर (करीब 6,100 किमी/घंटा)।
यह इतनी खास और घातक क्यों है?
- गति: यह इतनी तेज़ होती है कि दुश्मन को प्रतिक्रिया करने का समय ही नहीं मिलता।
- दिशा बदलने की क्षमता: बैलिस्टिक मिसाइलें एक तय रास्ते (Parabolic path) पर चलती हैं, जिसे रडार भांप लेता है और इंटरसेप्टर मिसाइल उसे मार गिराती है। लेकिन हाइपरसोनिक मिसाइल (विशेषकर HGV) रास्ता बदलती रहती है। यह कभी भी ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं हो सकती है।
- प्लाज्मा शील्ड: अत्यधिक गति के कारण मिसाइल के चारों ओर प्लाज्मा (आयनित गैस) की एक परत बन जाती है, जो रडार तरंगों को सोख लेती है, जिससे यह रडार पर ‘अदृश्य’ हो जाती है।
⚔️ तुलनात्मक विश्लेषण: हाइपरसोनिक मिसाइल vs. सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
भारत के पास पहले से दुनिया की बेहतरीन सुपरसोनिक मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ है, लेकिन हाइपरसोनिक उससे एक कदम आगे की तकनीक है।
| फीचर | सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (जैसे: ब्रह्मोस) | हाइपरसोनिक मिसाइल (जैसे: ध्वनि/HGV) |
| गति | मैक-2.8 से मैक-3 (ध्वनि से 3 गुना तेज़) | मैक-5 से मैक-20+ (ध्वनि से 5 गुना से ज्यादा) |
| ऊँचाई | बहुत कम ऊँचाई (Sea skimming) पर उड़ती है। | वायुमंडल के ऊपरी हिस्से (Edge of space) में ग्लाइड करती है। |
| इंजन | रैमजेट (Ramjet) इंजन। | स्क्रैमजेट (Scramjet) या बूस्ट-ग्लाइड तकनीक। |
| रोकना (Interception) | आधुनिक डिफेंस सिस्टम इसे रोक सकते हैं (कठिनाई से)। | वर्तमान में इसे रोकने वाला कोई विश्वसनीय डिफेंस सिस्टम नहीं है। |
| ऊर्जा (Kinetic Energy) | टक्कर मारने पर भारी तबाही। | अत्यधिक गति के कारण इसकी टक्कर (Impact) परमाणु बम जैसी तबाही ला सकती है (बिना विस्फोटक के भी)। |

ग्लोबल पावर प्ले: कौन कहां खड़ा है
दुनिया में हाइपरसोनिक हथियारों की रेस शुरू हो चुकी है। यह तकनीक केवल मुट्ठी भर देशों के पास है:
- रूस (लीडर): इनके पास ‘Avangard’ (HGV) और ‘Zircon’ (क्रूज मिसाइल) जैसी ऑपरेशनल मिसाइलें हैं, जिनका वे यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल भी कर चुके हैं।
- चीन: इनके पास ‘DF-17’ (HGV) है, जिसे विशेष रूप से अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर्स को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।
- अमेरिका: अभी परीक्षण चरण में है (जैसे Dark Eagle प्रोजेक्ट), लेकिन पूरी तरह ऑपरेशनल तैनाती में थोड़ा पीछे है।
- भारत: ‘ध्वनि’ और HSTDV के साथ भारत इस क्लब में धमाकेदार एंट्री करने वाला है।

भारत के पास वर्तमान में क्या है?
- HSTDV (Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle): भारत ने 2020 में इसका सफल परीक्षण किया था, जो स्क्रैमजेट तकनीक पर आधारित है।
- शौर्य (Shaurya): इसे अक्सर हाइपरसोनिक श्रेणी में रखा जाता है, क्योंकि टर्मिनल फेज (गिरते समय) में इसकी गति मैक-7 तक पहुँच जाती है।
- ब्रह्मोस-II (K): भारत और रूस मिलकर हाइपरसोनिक ब्रह्मोस बना रहे हैं, जिसकी रेंज और स्पीड ‘ज़िरकॉन’ जैसी होगी।

भारत vs. पाकिस्तान: क्या पाकिस्तान टिक पाएगा?
इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन पूरी तरह से एकतरफा है।
- भारत की स्थिति: भारत के पास स्वदेशी हाइपरसोनिक तकनीक (DRDO) है। भारत ‘ग्लाइड व्हीकल’ (HGV) और ‘क्रूज मिसाइल’ (HCM) दोनों पर काम कर रहा है। 2029-30 तक भारत के पास ऑपरेशनल हाइपरसोनिक रेजिमेंट होगी।
- पाकिस्तान की स्थिति: पाकिस्तान के पास वर्तमान में कोई स्वदेशी हाइपरसोनिक प्रोग्राम नहीं है।
- वे अपनी ‘अबाबील’ (Ababeel) मिसाइल में MIRV (एक साथ कई परमाणु बम गिराने की तकनीक) का दावा करते हैं, लेकिन वह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल नहीं है।
- पाकिस्तान पूरी तरह से चीन पर निर्भर है। भविष्य में वे चीन से ‘YJ-21’ का निर्यात संस्करण खरीद सकते हैं, लेकिन तकनीक विकसित करने में वे भारत से दशकों पीछे हैं।
- वे अपनी ‘अबाबील’ (Ababeel) मिसाइल में MIRV (एक साथ कई परमाणु बम गिराने की तकनीक) का दावा करते हैं, लेकिन वह हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल नहीं है।

संक्षेप में समझें:
‘ध्वनि’ का 2026 में होने वाला परीक्षण दक्षिण एशिया में “पावर डायनेमिक्स” को बदल देगा। पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम (जो चीनी HQ-9 पर आधारित हैं) मैक-6 की गति से दिशा बदलती हुई भारतीय मिसाइल को रोकने में पूरी तरह अक्षम साबित होंगे।
