International Fleet Review 2026: चीन-पाक ‘OUT’, अमेरिका-रूस ‘IN’, विशाखापत्तनम में दुनिया देखेगी भारत का सबसे बड़ा नौसैनिक शक्ति प्रदर्शन

फरवरी 2026 में विशाखापत्तनम का तट एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। 2016 के बाद यह पहला मौका होगा जब भारत ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ (IFR) की मेजबानी करेगा, जिसमें 50 से अधिक देशों की नौसेनाएं एक साथ जुटेंगी। इस आयोजन की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत यह है कि वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, दो धुर विरोधी महाशक्तियां अमेरिका और रूस भारतीय नौसेना के निमंत्रण पर एक मंच पर आने को तैयार हैं। 

हिंद महासागर में बढ़ी भारत की ताकत

यह भारत की उस रणनीतिक स्वायत्तता का जीता-जागता सबूत है, जो दुनिया को बताता है कि हिंद महासागर में भारत का कद कितना विशाल हो चुका है। हालांकि, इस बार का नजारा 2016 से बिल्कुल अलग होगा क्योंकि भारत ने कड़ा संदेश देते हुए चीन, पाकिस्तान और तुर्किए को इस मेगा शो से बाहर रखा है। यह फैसला साफ करता है कि भारत अब अपनी समुद्री सीमाओं और सुरक्षा हितों को लेकर किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है।

आत्मनिर्भर भारत का ट्रेलर 

इतिहास के पन्नों को पलटें तो ठीक चार साल पहले, 21 फरवरी 2022 को विशाखापत्तनम ने ही ‘प्रेसिडेंट फ्लीट रिव्यू’ (PFR) की मेजबानी की थी। वह आयोजन आजादी के अमृत महोत्सव के तहत हुआ था, जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 60 से अधिक भारतीय युद्धपोतों और पनडुब्बियों के बेड़े का निरीक्षण किया था। वह एक घरेलू शक्ति प्रदर्शन था, जिसका उद्देश्य देश को यह आश्वस्त करना था कि भारतीय नौसेना ‘हर काम देश के नाम’ के अपने आदर्श वाक्य पर खरी उतर रही है। उस दौरान स्वदेशी तकनीक से बने जहाजों की लंबी कतार ने दुनिया को भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ का पहला बड़ा ट्रेलर दिखाया था।

हिंद महासागर में भारत ने बदले नियम!

लेकिन अगर बात अंतरराष्ट्रीय स्तर की हो, तो हमें फरवरी 2016 के उस मंजर को याद करना होगा जब भारत ने पिछली बार ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ आयोजित किया था। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के नेतृत्व में हुए उस आयोजन में करीब 50 देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था। उस वक्त की कूटनीति और आज के हालात में जमीन-आसमान का फर्क आ चुका है। 2016 में चीन की नौसेना (PLA Navy) के जंगी जहाज भी विशाखापत्तनम आए थे और भारतीय जहाजों के साथ कतार में खड़े थे। लेकिन पिछले एक दशक में गलवान और हिंद महासागर में बढ़ी तनातनी ने रिश्तों की रूपरेखा बदल दी है। 2026 का यह आयोजन चीन के बिना होगा, जो यह संकेत है कि अब हिंद महासागर में नियम और शर्तें भारत तय करेगा।

US,UK, फ्रांस और जापान जैसे देश होंगे शामिल

इस बार के ‘फ्लीट रिव्यू’ में शामिल होने वाले देशों की सूची भारत के बढ़ते प्रभाव की गवाही देती है। 50 से ज्यादा देशों में से सबसे प्रमुख नाम अमेरिका और रूस हैं, जो अपनी-अपनी आधुनिकतम युद्धपोत और प्रतिनिधिमंडल भेज रहे हैं। इसके अलावा, भारत के पारंपरिक मित्र और शक्तिशाली समुद्री देश जैसे फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूके (ब्रिटेन), वियतनाम और दक्षिण कोरिया की नौसेनाओं के भी इस शक्ति प्रदर्शन में शामिल होने की पूरी संभावना है। क्वाड (Quad) देशों की मौजूदगी और रूस का साथ आना, यह समीकरण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को साधने में भारत की केंद्रीय भूमिका को और पुख्ता करेगा।

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