चीन-पाक को सीधी चेतावनी: जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया सेना का ‘फ्यूचर प्लान’, इन 5 पॉइंट्स में समझें पूरा मामला

सेना दिवस से ठीक पहले भारतीय सेना की वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस केवल मीडिया से संवाद नहीं था, यह देश को दिया गया एक भरोसा था। एक ऐसा भरोसा, जिसमें न तो उन्माद था, न ही अनावश्यक आक्रामकता, बल्कि ठोस तैयारी, आत्मविश्वास और भविष्य की स्पष्ट तस्वीर थी।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी जब राष्ट्र के सामने बोले, तो उनके शब्दों में एक अनुभवी सेनापति की गंभीरता थी, जो युद्ध की कीमत जानतें हैं लेकिन उसकी अनिवार्यता आने पर उसे जीतना भी जानते हैं। 

सेना दिवस (15 जनवरी) की पूर्व संध्या पर आयोजित वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जो संदेश दिया, वह केवल एक नियमित ब्रीफिंग नहीं थी, बल्कि भारत की रक्षा-सुरक्षा व्यवस्था के आमूल-चूल परिवर्तन का घोषणापत्र थी। उनके शब्दों में दृढ़ता थी, दूरदर्शिता थी और सबसे बढ़कर राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का भाव था।

जनरल द्विवेदी का यह वक्तव्य उस समय आया जब विश्व में सैन्य संघर्षों की संख्या और तीव्रता में तेजी से वृद्धि हो रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियाँ एक सरल सत्य को रेखांकित करती हैं- जो राष्ट्र तैयार रहते हैं, वे विजयी होते हैं।

LAC-LoC पर सेना सतर्क और अचूक

हाल के दिनों में जियो-पॉलिटिक्स के बदले हुए स्वरूप ने भले ही भारत और चीन के बीच राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाया है पर रणनीतिक और सैन्य मोर्चे पर ये स्थिति पहले की ही तरह है। चीन के साथ उत्तरी सीमा पर स्थिति स्थिर लेकिन संवेदनशील बनी हुई है। जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि लद्दाख में LAC पर भारत की सैन्य तैनाती में गर्मियों तक कोई कमी नहीं होगी। यह कूटनीतिक भाषा में दी गई एक कठोर चेतावनी है – भारत अपनी सतर्कता में कोई ढील नहीं देगा।

अप्रैल 2020 के बाद दोनों पक्षों ने सैन्य निर्माण किया, सेनाएं बढ़ाईं और हथियारों का जखीरा जमा किया। सेना प्रमुख का कहना है कि इस स्थिति के बाद दोनों देशों के बीच विश्वास को नए सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता है।

दो उप-क्षेत्रों, पारंपरिक क्षेत्रों में गश्त और चरवाहों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है, जो सकारात्मक संकेत है, लेकिन सेना प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि “बफर जोन” जैसी कोई चीज नहीं है – यह केवल एक अस्थायी स्थगन था।

खत्म हो रहे हैं आतंकी, बढ़ रहा है पर्यटन

जम्मू-कश्मीर में स्थिति का आकलन करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि 2025 में 31 आतंकवादियों को मार गिराया गया, जिनमें से 65 प्रतिशत पाकिस्तानी मूल के थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्थानीय आतंकवादी अब सिंगल डिजिट में हैं और घाटी में आतंकियों की भर्ती लगभग शून्य हो गई है- आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में केवल दो भर्तियां हुईं।

जम्मू-कश्मीर में सकारात्मक परिवर्तन के स्पष्ट संकेतों में विकास गतिविधियां, पर्यटन का पुनरुद्धार और शांतिपूर्ण श्री अमरनाथ यात्रा शामिल हैं, जिसमें चार लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने भाग लिया। यह “आतंकवाद से पर्यटन” की यात्रा का प्रमाण है।

ऑपरेशन सिंदूर: निर्णायक कार्रवाई का प्रतीक

पहलगाम हमले के जवाब में किए गए ऑपरेशन सिंदूर को जनरल द्विवेदी ने “स्पष्ट राजनीतिक निर्देश के तहत तीनों सेनाओं के शानदार तालमेल का सर्वोत्तम उदाहरण” बताया और कहा कि सशस्त्र बलों को पूर्ण परिचालन स्वतंत्रता दी गई थी।

7 मई को 22 मिनट में शुरू हुए और 10 मई तक 88 घंटों तक चले इस ऑपरेशन ने रणनीतिक मान्यताओं को पुनर्स्थापित किया। सेना ने 9 में से 7 लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया। यह न केवल आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करना था, बल्कि पाकिस्तान की परमाणु बयानबाजी को भी छिन्न-भिन्न करना था।

जनरल द्विवेदी ने आतंकियों एवं उनके आकाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि- ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है और भविष्य में किसी भी दुस्साहस का दृढ़ता से जवाब दिया जाएगा। यह संदेश है कि भारत अब प्रतिक्रियावादी नहीं, बल्कि सक्रिय रक्षा नीति अपना रहा है।

Make In India से मजबूत हो रही है सेना 

सेना प्रमुख ने घोषणा की कि 307 एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) के लिए ₹8,000 करोड़ का अनुबंध वित्तीय वर्ष के अंत से पहले अंतिम रूप दिया जाएगा। ATAGS देशज रूप से विकसित 155mm होवित्जर है जो विश्वस्तरीय क्षमता रखता है।

देशी पिनाका रॉकेट प्रणाली के लिए ₹10,500 करोड़ की रेंज-वर्धक गोला-बारूद की खरीद की योजना है। सेना प्रमुख ने कहा कि पिनाका की रेंज को 90 किलोमीटर तक बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। यदि यह सफल रहा, तो पिनाका ही भारत की प्राथमिक दूरस्थ आक्रमण प्रणाली बन सकती है।

सेना जल्द मिलेंगे जोरावर लाइट टैंक

भारतीय सेना ₹17,000 करोड़ मूल्य के 354 जोरावर लाइट टैंक हासिल करने के लिए तैयार है। यह उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, जो लद्दाख जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण होगा।

जोरावर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस भारत की पहली टैंक होगी, जिसमें ड्रोन निगरानी और लोइटरिंग गोला-बारूद की क्षमता होगी। इसका हल्का वजन इसे हवाई और रेल दोनों माध्यमों से तेजी से तैनात करने योग्य बनाता है।

अरुणाचल और सिक्किम में होगी इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स की तैनाती

अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में पहाड़ी इलाकों के लिए इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBGs) की स्थापना के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। यह एक क्रांतिकारी कदम होगा जो पैदल सेना, तोपखाना, टैंक, सेना विमान और हेलीकॉप्टरों को एक संगठित इकाई में एकीकृत करेगा।

सेना प्रमुख ने कहा कि सूचना संचालन समूहों, युद्धक इकाइयों और मानव-मानव रहित टीमों की स्थापना से परिचालन दक्षता में वृद्धि होगी। ड्रोन प्लाटून अब हर पैदल सेना बटालियन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं।

पूर्वोत्तर में सकारात्मक बदलाव

म्यांमार में अशांति के बावजूद, सुरक्षा बलों की तटस्थ, पारदर्शी और निर्णायक कार्रवाई से मणिपुर की स्थिति में 2025 में सुधार हुआ है। डूरंड कप का शांतिपूर्ण आयोजन, सांस्कृतिक त्योहारों की बहाली और कुकी विद्रोही समूहों के साथ संचालन निलंबन का नवीनीकरण स्थिरता के प्रमुख संकेतक हैं।

भविष्य का मंत्र ‘JAI’ हिंद

जनरल द्विवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “JAI” – संयुक्तता (Jointness), आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta) और नवाचार (Innovation) – के आह्वान को रेखांकित किया। यह केवल नारा नहीं, बल्कि भारतीय सेना के परिवर्तन का मूल सिद्धांत है।

संयुक्तता: तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और एकीकृत संचालन आत्मनिर्भरता: स्वदेशी हथियारों और प्रणालियों पर बढ़ता जोर नवाचार: उभरती प्रौद्योगिकियों – AI, क्वांटम, साइबर, ड्रोन – को शामिल करना

भविष्य की सेना का निर्माण

जनरल द्विवेदी का दृष्टिकोण स्पष्ट है – भविष्य का युद्ध तकनीक द्वारा निर्धारित होगा, संख्या से नहीं। ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और मानव-मानव रहित संयुक्त टीमों पर जोर यह दर्शाता है कि भारतीय सेना 21वीं सदी के युद्ध के लिए स्वयं को तैयार कर रही है।

ATAGS, पिनाका, जोरावर टैंक – ये सभी देशज हथियार हैं। यह रणनीतिक स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करके, भारत न केवल आर्थिक बचत कर रहा है, बल्कि तकनीकी क्षमता भी विकसित कर रहा है।

निर्णायक रणनीति

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने एक नया संदेश दिया है – भारत अब सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। राजनीतिक निर्णय लेने की इच्छाशक्ति और सैन्य क्षमता का यह संयोजन भारत को एक अधिक मजबूत प्रतिरोधक शक्ति बनाता है।

जनरल द्विवेदी का यह कहना कि सेना पूर्ण रूप से जमीनी अभियान के लिए तैयार थी, यह दर्शाता है कि भारत अब रक्षात्मक मुद्रा से आक्रामक रक्षा की ओर बढ़ रहा है।

जवानों की सुरक्षा

आधुनिक हथियारों और तकनीक के साथ-साथ, सैनिकों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जोरावर टैंक में एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम, तोपखाने में काउंटर-ड्रोन क्षमता – ये सभी यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे जवानों को बेहतर सुरक्षा मिले।

बहुआयामी चुनौतियों का सामना

भारत को दो-ढाई मोर्चों की चुनौती का सामना है – चीन, पाकिस्तान और आंतरिक सुरक्षा। इस जटिल परिदृश्य में, जनरल द्विवेदी की रणनीति संतुलित और व्यापक है। सीमाओं पर सतर्कता, आधुनिकीकरण में तेजी, और त्रि-सेवा समन्वय – ये सभी एक समग्र रक्षा नीति के अंग हैं।

अगले 5 साल में क्या-क्या होगा 

अगले पांच वर्षों में, भारतीय सेना एक पूर्णतः परिवर्तित बल के रूप में उभरेगी:

  1. तकनीकी एकीकरण: AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, 6G संचार प्रणाली का पूर्ण एकीकरण
  2. स्वदेशी शस्त्रीकरण: 70% से अधिक हथियार और उपकरण देशज होंगे
  3. लचीली संरचना: IBGs और मॉड्यूलर इकाइयां तेज तैनाती सुनिश्चित करेंगी
  4. साइबर और अंतरिक्ष क्षमता: नए युद्ध क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति

चुनौतियां और समाधान

हालांकि यात्रा आसान नहीं है। वित्तीय बाधाएं, लालफीताशाही और तकनीकी जटिलताएं बाधा बन सकती हैं। लेकिन जैसा कि जनरल द्विवेदी ने कहा, राष्ट्र की रक्षा में कोई समझौता नहीं हो सकता।

IBGs की स्थापना में विलंब एक चिंता है, लेकिन रक्षा मंत्रालय को प्रस्तुतीकरण पूरा होने से उम्मीद है कि जल्द ही निर्णय होगा। हर बड़े परिवर्तन में समय लगता है, लेकिन दिशा सही है।

संक्षेप में समझें 

जनरल उपेंद्र द्विवेदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस केवल सूचना देने का माध्यम नहीं थी – यह राष्ट्र के प्रति सेना की प्रतिबद्धता का पुनः आश्वासन थी। उनके शब्दों में विश्वास था, योजनाओं में स्पष्टता थी, और दृष्टिकोण में दूरदर्शिता थी।

भारतीय सेना आज जिस परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, वह इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनेगा। पारंपरिक युद्ध कौशल और अत्याधुनिक तकनीक का यह संगम, स्वदेशीकरण और वैश्विक मानकों का यह संतुलन, और सबसे बढ़कर राष्ट्रभक्ति और व्यावसायिकता का यह समन्वय – यही भारतीय सेना को विश्व में अद्वितीय बनाता है।

जैसा कि सेना प्रमुख ने कहा – जो राष्ट्र तैयार रहते हैं, वे विजयी होते हैं। और भारत तैयार है। हमारी सेना तैयार है। हमारे जवान तैयार हैं।

सीमाओं पर चौकस, तकनीक में अग्रणी, और राष्ट्र के प्रति समर्पित – यही है आज की भारतीय सेना। और कल की सेना? वह और भी अधिक सशक्त, और भी अधिक आत्मनिर्भर, और भी अधिक निर्णायक होगी।


राष्ट्र की रक्षा केवल सीमाओं पर नहीं होती, बल्कि प्रयोगशालाओं में, कारखानों में, और हर नागरिक के संकल्प में होती है। जनरल द्विवेदी का संदेश यही है – हम सब मिलकर एक अजेय भारत का निर्माण कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *