वैश्विक कूटनीति और सैन्य मामलों में जब भी भारत की संप्रभुता की बात आती है, तो ‘शक्ति’ ही सबसे बड़ा तर्क बनकर उभरती है। हाल ही में एक सार्वजनिक सेमिनार के दौरान भारतीय सेना के पूर्व दिग्गज लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) के.जे.एस. ढिल्लों, जिन्हें सैन्य गलियारों में उनके अदम्य साहस के लिए जाना जाता है, ने भारत की सुरक्षा और विदेशी हस्तक्षेप के खतरों पर एक ऐसा बयान दिया है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
सेमिनार में जब उनसे अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में किए गए हालिया हस्तक्षेप और भारत में ऐसी किसी संभावना को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने न केवल उन आशंकाओं को खारिज किया, बल्कि भारत की बढ़ती ताकत का एक ऐसा आईना दिखाया जिससे दुनिया की आंखें चौंधिया सकती हैं।
“क्या भारत में भी हो सकता है वेनेजुएला जैसा ऑपरेशन?”
सेमिनार के दौरान एक जागरूक प्रतिभागी ने जनरल ढिल्लों से पूछा कि जिस तरह हाल के वर्षों में हमने देखा कि अमेरिका ने वेनेजुएला जैसे संप्रभु राष्ट्र में घुसकर वहां के नेतृत्व को चुनौती दी और सैन्य हस्तक्षेप किया, क्या भारत में भी ऐसी किसी स्थिति की कल्पना की जा सकती है? क्या भारत आज इतना मजबूत है कि वह किसी भी विदेशी ताकत के ‘रेजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) के एजेंडे को नाकाम कर सके?
जनरल ढिल्लों का बेबाक जवाब
इस संवेदनशील सवाल का जवाब देते हुए जनरल ढिल्लों ने बड़े ही तार्किक और कड़े शब्दों में वैश्विक राजनीति का कड़वा सच बयां किया। उन्होंने कहा:
“मैं इस बारे में बहुत स्पष्ट कर दूँ कि आज हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। और यह बात दुनिया को हजम नहीं हो रही है। दुनिया हमारी इस प्रगति से खुश नहीं है; वे हमारी तरक्की से जलते हैं। हमें इस बात में कोई भी संदेह नहीं होना चाहिए कि किसी को बहुत अच्छा लग रहा है कि भारत आगे बढ़ रहा है। नहीं सर, उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा है। वे हमसे ईर्ष्या महसूस कर रहे हैं और केवल ऐसे मौकों की तलाश में हैं जहाँ वे हमें कमजोर कर सकें।”
जनरल ढिल्लों ने आगे जो कहा, वह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का मूल मंत्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी ताकतों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें भारत में हस्तक्षेप करने का ‘मौका’ ही नहीं मिल रहा है। उन्होंने इसके पीछे तीन मुख्य स्तंभ बताए: आर्थिक शक्ति, सैन्य पराक्रम और विशाल जनसंख्या का बाजार।
वेनेजुएला का घटनाक्रम: एक देश के बर्बाद होने की कहानी
जनरल ढिल्लों के जवाब की गंभीरता को समझने के लिए वेनेजुएला के संकट को जानना अनिवार्य है। वेनेजुएला, जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, आज भुखमरी और राजनीतिक अस्थिरता का शिकार है।
- आर्थिक पतन: वेनेजुएला की बर्बादी की शुरुआत तब हुई जब उसने अपनी अर्थव्यवस्था को केवल तेल निर्यात पर निर्भर कर दिया। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें गिरीं, तो देश की अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह गई। वहां ‘हाइपरइन्फ्लेशन’ (अत्यधिक महंगाई) इस कदर बढ़ी कि लोग एक ब्रेड खरीदने के लिए झोले भरकर नोट ले जाने लगे।
- अमेरिकी हस्तक्षेप: जनवरी 2026 की शुरुआत में, अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत एक साहसी सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी विशेष बलों ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में घुसकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके महल से गिरफ्तार कर लिया। अमेरिका ने उन पर ‘नार्को-टेररिज्म’ का आरोप लगाया और दावा किया कि मादुरो शासन वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है।
- विभाजित समाज: वेनेजुएला में विदेशी हस्तक्षेप सफल इसलिए हुआ क्योंकि वहां की जनता दो गुटों में बंटी हुई थी और सेना के अंदर भी असंतोष था। इसी ‘फूट’ ने बाहरी ताकतों को घुसने का मौका दिया।
भारत के पास क्यों नहीं फटक सकतीं विदेशी ताकतें?
जनरल ढिल्लों ने भारत की तुलना वेनेजुएला से करते हुए तीन बड़े अंतर बताए, जो भारत को एक ‘अभेद्य किला’ बनाते हैं:
1. आर्थिक आत्मनिर्भरता और विशाल बाजार
जनरल ने जोर देकर कहा कि आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने एक बहुत ही सरल लेकिन गहरा उदाहरण दिया— “अगर दुनिया का कोई भी देश एक छोटी सी सुई भी बनाता है, तो उसे बेचने के लिए उसे भारत के बाजार में आना ही होगा। हम दुनिया की कुल आबादी का छठा हिस्सा (One-Sixth of the world) हैं। कोई भी देश इतने बड़े बाजार को खोने का जोखिम नहीं उठा सकता।”
2. शक्तिशाली सेना और परमाणु शक्ति
भारत की सेना दुनिया की सबसे बेहतरीन और अनुशासित सेनाओं में से एक है। जनरल ढिल्लों के अनुसार, भारत के पास केवल हथियारों की ताकत नहीं है, बल्कि उस ताकत को इस्तेमाल करने की ‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’ भी है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे उदाहरणों की ओर इशारा करते हुए समझाया कि भारत अपनी सीमाओं के अंदर और बाहर दुश्मनों को जवाब देना जानता है।
3. लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता
वेनेजुएला के विपरीत, भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहाँ सत्ता का परिवर्तन मतपेटियों से होता है, न कि सैन्य विद्रोहों से। जनरल ने कहा कि भारत की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है, जो विदेशी ताकतों को हस्तक्षेप का कोई ‘छेद’ या ‘कमजोरी’ नहीं देती।
अपने संबोधन के अंतिम भाग में जनरल ढिल्लों ने 140 करोड़ भारतीयों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमारी आबादी एक ‘एसेट’ (संपत्ति) तभी तक है जब तक वह सक्षम है।
“हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारा मानव संसाधन शिक्षित हो, तकनीकी रूप से सक्षम हो और उनके पास कौशल (Skill) हो। एक सक्षम मानव संसाधन देश की संपत्ति होता है, जबकि बिना कौशल और शिक्षा वाली आबादी देश पर बोझ बन सकती है। यदि हम अपनी युवा पीढ़ी को सशक्त रखते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत हमें पीछे नहीं धकेल सकती।”
कुछ देशों को चुभ रही है भारत की तरक्की
लेफ्टिनेंट जनरल के.जे.एस. ढिल्लों का यह बयान भारतीय नागरिकों के लिए गर्व का विषय है, तो वहीं वैश्विक ताकतों के लिए एक चेतावनी। उनकी बात का सार यही है कि ‘कमजोरी ही युद्ध और हस्तक्षेप को निमंत्रण देती है।’ आज का भारत आर्थिक रूप से समृद्ध है, सैन्य रूप से सक्षम है और कूटनीतिक रूप से चतुर है।
दुनिया चाहे कितनी भी ईर्ष्या करे, लेकिन हकीकत यही है कि 21वीं सदी भारत की है। जनरल ढिल्लों के शब्दों में कहें तो, भारत की विकास दर (6-8%) के सामने जब दुनिया 1-2% पर संघर्ष कर रही है, तो ईर्ष्या स्वाभाविक है, लेकिन हमारी मजबूती ही उस ईर्ष्या को भय में बदल देती है।
