28 फरवरी 2026 की सुबह अमेरिका और इजराइल ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की। यह अभियान ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों और शीर्ष सैन्य-नागरिक नेतृत्व को निशाना बनाकर चलाया गया।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने रविवार तड़के की। वे अपने आवास स्थित कार्यालय में थे। देश में 40 दिन के शोक की घोषणा की गई।
हमलों के पहले चरण में ईरान के 24 प्रांतों को निशाना बनाया गया। ईरानी रेड क्रीसेंट के अनुसार कम से कम 201 लोग मारे गए।
खामेनेई के बाद – उत्तराधिकार का संकट
खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। उनके जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान का नेतृत्व अब किसके हाथ में जाएगा।
ईरान के संविधान के अनुसार एक अंतरिम परिषद सत्ता संभालती है, जबकि 88 इस्लामिक धर्मगुरुओं वाली ‘एसेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ नए सर्वोच्च नेता का चयन करती है। लेकिन इजराइल का कहना है कि शुरुआती हमलों में सात वरिष्ठ रक्षा और खुफिया अधिकारी मारे गए और 30 शीर्ष सैन्य तथा नागरिक नेताओं को निशाना बनाया गया।
नेतृत्व की इस शृंखला के बिखरने के बाद अली लारिजानी सबसे वरिष्ठ जीवित नागरिक अधिकारी के रूप में उभरे हैं। उन्होंने वादा किया कि ईरान इजराइल और अमेरिका को ‘अविस्मरणीय सबक’ देगा।
खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई लंबे समय से संभावित उत्तराधिकारी के रूप में चर्चा में थे। इजराइली अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने खामेनेई के बेटों को भी निशाना बनाया, हालांकि खुफिया आकलन बताते हैं कि वे हमलों में बचे रहे।
तेहरान के कुछ हिस्सों में लोग खामेनेई की मौत का जश्न मनाते सड़कों पर निकले। लॉस एंजिलिस में भी इसी तरह के दृश्य देखे गए।

इजराइल-अमेरिका का आगे का प्लान
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इजराइल ईरानी नेतृत्व को निशाना बना रहा है, जबकि अमेरिका ‘तत्काल खतरा’ पैदा करने वाले सैन्य ठिकानों और बैलिस्टिक मिसाइल साइटों पर हमला कर रहा है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि ईरान पर ‘भारी और सटीक बमबारी’ पूरे सप्ताह या ‘जितने समय तक आवश्यक हो’ बिना रुके जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस ‘बेहद दुष्ट, कट्टरपंथी तानाशाही’ को अमेरिका और उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनने से रोकने के लिए यह अभियान चला रहा है।
ट्रम्प ने IRGC सदस्यों से आत्मसमर्पण की अपील की और उन्हें ‘ईरानी देशभक्तों के साथ शांतिपूर्वक विलय’ करने को कहा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनका प्रशासन ईरान में नए नेतृत्व की स्थापना में भूमिका निभाएगा।
नेतान्याहू ने साफ कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक ‘ईरानी जनता स्वतंत्र नहीं हो जाती।’ इजराइल जून 2025 में पहले ही ईरान की वायु-रक्षा प्रणाली को नष्ट कर चुका था और परमाणु कार्यक्रम को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया था।
ईरान का पलटवार – क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दागीं। IRGC ने दावा किया कि मध्य-पूर्व में सभी अमेरिकी और इजराइली सैन्य ठिकानों को ईरानी मिसाइलों का सामना करना पड़ा।
ईरान के निशाने पर बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पाँचवाँ बेड़ा, कतर का अल-उदैद एयर बेस और यूएई का अल-धफरा एयर बेस थे।
जॉर्डन के सशस्त्र बलों ने शनिवार सुबह से 13 बैलिस्टिक मिसाइलें सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कीं। कुल मिलाकर जॉर्डन ने 49 ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें अपने क्षेत्र में रोकीं।
हूतियों ने घोषणा की कि वे लाल सागर में हमले फिर से शुरू करेंगे। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी दी यह वह जलमार्ग है जिससे दुनिया के तेल का करीब 20 प्रतिशत गुजरता है।
भारतीय एयरलाइनों इंडिगो और एयर इंडिया ने मध्य-पूर्व के लिए उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं।
युद्ध कितना भयावह हो सकता है
पहला खतरा – होर्मुज का बंद होना: यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी व्यवधान आएगा। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी और इसका असर भारत सहित दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
दूसरा खतरा – IRGC की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता: ईरान की परमाणु सुविधाएं और वायु रक्षा तंत्र काफी हद तक बर्बाद हो चुके हैं, लेकिन उसका बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम अभी भी सक्रिय है। यह क्षमता खाड़ी देशों के लिए सबसे बड़ा तात्कालिक खतरा है।
तीसरा खतरा – नेतृत्व का शून्य: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने जनवरी में स्वीकार किया था कि खामेनेई हटने के बाद ‘कोई नहीं जानता’ कि कौन कमान संभालेगा। नेतृत्व का यह शून्य IRGC को सत्ता हथियाने का मौका दे सकता है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ेगी।
चौथा खतरा – प्रॉक्सी युद्ध का विस्तार: जून 2025 के 12 दिन के युद्ध के विपरीत इस बार संघर्ष सीमित नहीं है। खाड़ी देशों की राजधानियों में विस्फोट, हूतियों की वापसी और इराकी-सीरियाई मिलिशिया की सक्रियता यह दर्शाती है कि यह एक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले चुका है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में कहा कि ‘सैन्य कार्रवाई ऐसी घटनाओं की श्रृंखला को भड़काने का जोखिम लेती है जिसे कोई नियंत्रित नहीं कर सकता।’
संक्षेप में समझें
| वर्तमान स्थिति | भविष्य की संभावनाएं |
|---|---|
| खामेनेई | मृत, 40 दिन का शोक घोषित |
| ईरान का नेतृत्व | अनिश्चित अली लारिजानी अंतरिम प्रभारी |
| अमेरिकी अभियान | जारी, कई दिनों तक चलने की संभावना |
| ईरान का जवाब | 6 देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमला |
| होर्मुज | बंद करने की धमकी |
| अंतरराष्ट्रीय उड़ानें | व्यापक व्यवधान |
स्थिति तेजी से बदल रही है, अगले 48-72 घंटे निर्णायक होंगे जिसमें यह तय हो जाएगा कि यह संघर्ष एक सीमित सैन्य अभियान रहेगा या एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदलेगा।
