हिंद महासागर से लेकर जापान तक फैले पूरे Indo-Pacific क्षेत्र में चीन की दादागीरी लगातार बढ़ती जा रही है। चीनी मछुआरों का अवैध आवागमन, चीनी नौसेना की आक्रामक गश्त और ताकत के बल पर यथास्थिति बदलने की कोशिशें क्षेत्र के देशों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। इसी बढ़ते खतरे के खिलाफ एक सशक्त और प्रभावी रणनीति गढ़ने के लिए India और Japan अब मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुई एक अहम बैठक ने साफ संदेश दिया कि दोनों देश इस दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं, बल्कि साझा ताकत के साथ इसका मुकाबला करने की तैयारी में हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी के बीच हुई इस द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने न सिर्फ अपनी चिंताएं साझा कीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा सहयोग को लेकर एक अहम MoU पर भी हस्ताक्षर किए।
बैठक की पृष्ठभूमि: Special Strategic and Global Partnership की साझा चिंताएं
यह बैठक “Japan-India Special Strategic and Global Partnership” के दायरे में हुई, जो Indo-Pacific क्षेत्र में शांति और स्थिरता के महत्वपूर्ण स्तंभों में गिनी जाती है। जुलाई 2026 में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं द्वारा जारी संयुक्त वक्तव्य को याद करते हुए दोनों मंत्रियों ने एक स्वतंत्र और खुले Indo-Pacific क्षेत्र की दिशा में रक्षा सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात पर अपने आकलन साझा करने के महत्व पर सहमति जताई और नौवहन तथा हवाई उड़ान की आजादी में बाधा डालने वाली किसी भी एकतरफा हरकत या दबाव के जरिए यथास्थिति बदलने के प्रयास का कड़ा विरोध किया। यह बयान सीधे तौर पर क्षेत्र में बढ़ती चीनी आक्रामकता की ओर इशारा करता है, जिसने दोनों लोकतांत्रिक देशों को और करीब ला दिया है।

यह मुलाकात अचानक हुई कोई घटना नहीं थी। इसकी नींव कुछ ही हफ्ते पहले पड़ चुकी थी, जब जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली का दौरा किया था। उस मुलाकात में ही दोनों पक्षों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और परिपुष्ट करने पर सहमति जता दी थी, और कोइजुमी की यह दो दिवसीय यात्रा उसी गति को आगे बढ़ाने वाली कड़ी साबित हुई।
Maritime Security MoU: समुद्री सुरक्षा पर ऐतिहासिक समझौता
बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि रही जापान और भारत के रक्षा मंत्रालयों के बीच Maritime Security Cooperation MoU पर हस्ताक्षर। यह समझौता भारतीय नौसेना और Japan Maritime Self-Defense Force के बीच सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए एक ठोस ढांचा प्रदान करता है। इसके तहत Maritime Domain Awareness यानी MDA से जुड़ी सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाया जाएगा, साथ ही Search and Rescue (SAR) और Humanitarian Assistance and Disaster Relief (HADR) जैसे क्षेत्रों में तालमेल को गहरा किया जाएगा। दोनों देशों ने नौसैनिक जहाजों और इकाइयों के आपसी दौरों, संयुक्त अभ्यासों, विषय विशेषज्ञों के आदान-प्रदान तथा बंदरगाहों एवं मरम्मत सुविधाओं के उपयोग के जरिए समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए समन्वय मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके अलावा दोनों पक्ष जल्द ही एक पारस्परिक पोत मरम्मत समझौते को भी अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

‘Make in India’ प्रारूप के अंतर्गत गहन समुद्री सुरक्षा सहयोग और रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों मंत्रियों ने विचारों का व्यापक आदान-प्रदान किया। यह बैठक महज औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने द्विपक्षीय रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने का अवसर भी प्रदान किया।
Mine Countermeasures और Naval Shipbuilding में साझेदारी की संभावना
चर्चा के दौरान एक अहम पहलू यह भी उभरा कि दोनों देश बारूदी सुरंगों को नष्ट करने यानी mine countermeasures की अपनी-अपनी क्षमताओं में तालमेल कैसे बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता को जोड़ते हुए naval shipbuilding और डिजाइन में संयुक्त विकास की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। “Make in India” पहल के अंतर्गत भारत की विनिर्माण क्षमताओं का जापान किस तरह उपयोग कर सकता है, इस पर भी गहन बातचीत करने पर सहमति बनी। यह दिशा भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के साथ सीधे तौर पर जुड़ती है, जहां घरेलू निर्माण क्षमता को वैश्विक तकनीकी साझेदारी से जोड़कर मजबूत किया जा रहा है।
Veer Guardian 26: पहली बार भारत आएंगे जापानी लड़ाकू विमान
दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों के लगातार बढ़ते दायरे का स्वागत किया। इनमें थल सेना का अभ्यास ‘Dharma Guardian’ और नौसैनिक अभ्यास ‘JIMEX’ पहले से ही नियमित रूप से आयोजित होते रहे हैं, लेकिन इस साल एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। वायु सेना अभ्यास “Veer Guardian 26” के तहत Japan Air Self-Defense Force के लड़ाकू विमान पहली बार भारत आएंगे और अभ्यास में हिस्सा लेंगे। यह जापान-भारत रक्षा संबंधों में एक बड़ा प्रतीकात्मक और परिचालन दोनों ही तरह से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा दोनों देशों ने जटिल सैन्य अभ्यासों को बढ़ावा देने, मानवरहित प्रणालियों को इनमें शामिल करने और मौका मिलने पर बेहद कम समय की सूचना पर संयुक्त अभ्यास आयोजित करने पर भी सहमति जताई। Special Operations Forces के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने और भारत की Integrated Theatre Commands के गठन के बाद उनके साथ सहयोग जारी रखने पर भी बातचीत हुई।

Unicorn Antenna System और 3 सिद्धांतों में संशोधन
बैठक में एक और महत्वपूर्ण घोषणा हुई, जो दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरण और तकनीक हस्तांतरण के इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सकती है। जहाज पर तैनात होने वाली Unicorn इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन एंटीना प्रणाली से जुड़ी यह परियोजना भारत और जापान के बीच रक्षा उपकरणों के हस्तांतरण की पहली परियोजना है। दोनों मंत्रियों ने इसे इस क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का प्रतीक बताते हुए इसे जल्द साकार करने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प जताया।
इस परियोजना को गति देने वाला एक और अहम घटनाक्रम है जापान द्वारा Three Principles on Defense Equipment and Technology Transfer में हाल ही में किया गया संशोधन। दशकों से जापान की रक्षा निर्यात नीति इन्हीं तीन सिद्धांतों के दायरे में सीमित रही है, और इनमें बदलाव का सीधा असर यह है कि टोक्यो अब अपने साझेदार देशों, खासकर भारत जैसे भरोसेमंद रणनीतिक मित्र के साथ, रक्षा उपकरण और तकनीक साझा करने में पहले से ज्यादा लचीलापन दिखा सकता है। राजनाथ सिंह ने इस प्रारूप की समीक्षा का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह साझेदारी और गहरी होगी। इसके साथ ही DRDO और जापान की ATLA के बीच अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों पर शोध एवं विकास सहयोग को मजबूत करने और Defense Industry Forum आयोजित करने की मंशा भी दोहराई गई।

Trilateral Cooperation: तीसरे देशों के साथ सहयोग और क्षेत्रीय पहल
भारत और जापान अब अपने द्विपक्षीय दायरे से आगे बढ़कर क्षेत्रीय साझेदारियों को भी मजबूत कर रहे हैं। दोनों मंत्रियों ने इस साल फरवरी में India, Japan और Indonesia की भागीदारी वाले पहले Trilateral Naval Passage Exercise का स्वागत किया। Indo-Pacific क्षेत्र की व्यापक तस्वीर हासिल करने और साझा तौर पर शांति एवं स्थिरता में योगदान देने के मकसद से उच्च स्तरीय आदान-प्रदान, अभ्यासों और अन्य पहलों के जरिए तीसरे देशों के साथ सहयोग को और बढ़ाने पर भी सहमति बनी। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में साझेदार देशों को कर्मियों और आपूर्ति पहुंचाने के लिए Indo-Pacific Logistics Network यानी IPLN के जरिए सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी बात हुई, जिसका दूसरा Tabletop Exercise इसी साल सितंबर में जापान के रक्षा मंत्रालय में आयोजित किया जाएगा।
आगे की राह: 2+2 Ministerial Meeting और नया Working Group
जुलाई 2026 के जापान-भारत संयुक्त वक्तव्य में तय दिशा-निर्देशों को याद करते हुए दोनों मंत्रियों ने इसी साल टोक्यो में चौथी Japan-India Foreign and Defense Ministerial Meeting यानी “2+2” आयोजित करने की दिशा में बातचीत तेज करने पर सहमति जताई। साथ ही दोनों देशों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति सुनिश्चित करने के लिए जरूरत पड़ने पर आपस में परामर्श करने पर भी सहमति बनी। सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए Director-General/Joint Secretary स्तर के नेतृत्व में एक नया Working Group बनाने का भी फैसला हुआ, जो परिचालन, खुफिया, उपकरण, तकनीक और औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग का समग्र समन्वय करेगा और दोनों देशों की संप्रभु नीतियों का पूरा सम्मान करते हुए इसके क्रियान्वयन में तेजी लाएगा।

दिल्ली से मुंबई तक: कोइजुमी की Western Naval Command यात्रा
भारत की अपनी पहली यात्रा पर पहुंचे शिंजीरो कोइजुमी की शुरुआत नई दिल्ली से हुई, जहां उन्होंने National War Memorial पर पुष्पांजलि अर्पित कर भारत के शहीद वीरों को श्रद्धांजलि दी और तीनों सेनाओं ने उन्हें Guard of Honour दिया। इसके बाद 19 अगस्त 2026 को उन्होंने मुंबई स्थित Western Naval Command का दौरा किया, जहां नौसेना प्रमुख Admiral Krishna Swaminathan और Western Naval Command के Flag Officer Commanding-in-Chief Vice Admiral Sanjay Vatsayan के साथ उनकी विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल को भारतीय नौसेना की भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और परिचालन क्षमताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
Western Naval Command में कोइजुमी ने Guard of Honour का निरीक्षण भी किया। इससे पहले उन्होंने नौसेना गोदी स्थित Gaurav Stambh पर पुष्पांजलि अर्पित की, जो भारतीय नौसेना के शौर्य और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा उन्होंने स्वदेशी युद्धपोत INS Chennai का भी दौरा किया, जो भारत की बढ़ती नौसैनिक निर्माण क्षमता को करीब से देखने का अवसर था।
कोइजुमी की यह दो दिवसीय यात्रा द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में बढ़ती गति को साफ तौर पर रेखांकित करती है और साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करती है। India और Japan के मजबूत संबंध एक स्वतंत्र, खुले, सुदृढ़ और समृद्ध Indo-Pacific क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, और यह यात्रा उसी दृष्टिकोण को ठोस कदमों में बदलने की दिशा में एक और अहम पड़ाव साबित हुई।
कुल मिलाकर, यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक कूटनीतिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि Indo-Pacific क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागीरी के बीच भारत और जापान के गहराते भरोसे और साझा रणनीतिक दृष्टिकोण का प्रमाण है। समुद्री सुरक्षा से लेकर तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त सैन्य अभ्यासों तक, दोनों देशों ने आने वाले वर्षों के लिए एक व्यापक और ठोस रोडमैप तैयार किया है।
