‘ऑपरेशन सिंदूर’ के रणनीतिकार एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी हुए रिटायर, कारगिल से लेकर वाइस चीफ तक, ऐसा रहा 40 वर्षों का सफर

भारतीय वायु सेना के इतिहास में 31 दिसंबर 2025 का दिन एक युग के समापन के रूप में दर्ज किया गया, जब वायु सेना के उप प्रमुख (Vice Chief of the Air Staff) एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने अपनी वर्दी को अलविदा कहा। राष्ट्र की सुरक्षा में चार दशकों तक प्रहरी की भूमिका निभाने वाले एयर मार्शल तिवारी का करियर केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल की एक जीवित मिसाल रहा है। 7 जून 1986 को जब वे एक युवा फ्लाइंग पायलट के रूप में लड़ाकू विमान शाखा में शामिल हुए थे, तब से लेकर आज तक उन्होंने आसमान की बुलंदियों को न केवल छूआ, बल्कि उस पर अपना आधिपत्य भी जमाया।

3600 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव

एयर मार्शल तिवारी का सैन्य सफर किसी रोमांचक गाथा से कम नहीं है। 3600 घंटे से अधिक के उड़ान अनुभव के साथ, उन्होंने वायु सेना के सबसे जटिल और आधुनिक विमानों को संभाला। एक ‘एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट’ और अमेरिका के प्रतिष्ठित एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज के स्नातक के रूप में, उनकी तकनीकी समझ बेजोड़ थी। यही कारण था कि वे स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस (LCA) के परीक्षण चरणों में धुरी बने रहे और 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान जब दुश्मनों के हौसले पस्त करने थे, तो उन्होंने ‘लाइटनिंग’ लेजर डेजिग्नेशन पॉड के सटीक संचालन से युद्ध की दिशा बदल दी थी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में लिए रणनीतिक निर्णय

उनके करियर का सबसे स्वर्णिम और साहसिक अध्याय ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के रूप में लिखा गया। जब राष्ट्र की सुरक्षा पर एक गंभीर संकट मंडराया था, तब एयर मार्शल तिवारी की ही वह रणनीतिक सूझबूझ थी जिसने इस ऑपरेशन को सफलता के शिखर तक पहुँचाया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके द्वारा लिए गए त्वरित और सटीक निर्णयों ने न केवल दुश्मन के मंसूबों को ध्वस्त किया, बल्कि भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता का लोहा पूरी दुनिया को मनवाया। यह उनकी युद्धक नेतृत्व क्षमता ही थी, जिसके चलते उन्हें 2025 में युद्ध काल में विशिष्ट सेवा के लिए प्रतिष्ठित ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक’ (SYSM) से अलंकृत किया गया।

रणनीति से कूटनीति तक 

अपने पूरे कार्यकाल में उन्होंने न केवल युद्ध के मैदान में बल्कि कूटनीतिक गलियारों में भी भारत का मान बढ़ाया। पेरिस में एयर अताशे के रूप में उनकी भूमिका हो या फिर दक्षिण पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में सीमाओं की निगहबानी, उन्होंने हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। उनकी सेवाओं के सम्मान में राष्ट्र ने उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और वायुसेना पदक से सम्मानित किया, जो उनकी वर्दी पर चमकते हुए सितारों की तरह उनके शौर्य की गवाही देते रहेंगे।

आपकी सेवाओं के लिए धन्यवाद 

ControlD Defence News की ओर से हम एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी के जज्बे, नेतृत्व और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी ऐतिहासिक सफलताओं में उनके अमूल्य योगदान के लिए नतमस्तक हैं। सर, आपने देश को सुरक्षित हाथों में रखा, इसके लिए राष्ट्र सदैव आपका ऋणी रहेगा। हम आपके स्वस्थ, सुखद और शानदार सेवानिवृत्त जीवन की कामना करते हैं। जय हिंद!

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