अब ब्रह्मोस की रेंज में पाकिस्तान का हर कोना…आतंकियों को खोज-खोज कर मारेगी नई मिसाइल, इस्लामाबाद से बीजिंग तक मची खलबली

भारतीय रक्षा क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। डीआरडीओ (DRDO) के प्रमुख ने खुलासा किया है कि भारत की सबसे घातक ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता को अब और अधिक विस्तार दिया जा रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन अब तीनों सेनाओं के लिए हाइपरसोनिक मिसाइलों की एक पूरी नई रेंज विकसित करने पर काम कर रहा है, जो युद्ध की स्थिति में भारत की ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।

डीआरडीओ (DRDO) चीफ का बड़ा खुलासा

डीआरडीओ प्रमुख ने हालिया संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत अब केवल सुपरसोनिक तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि ब्रह्मोस मिसाइल के नए वेरिएंट्स पर काम चल रहा है जिनकी रेंज को वर्तमान सीमा से काफी आगे ले जाया जाएगा। इसके साथ ही, थल सेना, नौसेना और वायुसेना की विशिष्ट जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग श्रेणियों की हाइपरसोनिक मिसाइलें तैयार की जा रही हैं, जो रडार की पकड़ में आए बिना दुश्मन का काल बनेंगी।

हाइपरसोनिक युग में भारत की धमाकेदार  एंट्री

हाइपरसोनिक मिसाइलों की खासियत यह है कि ये आवाज की गति से कम से कम पांच गुना तेजी (Mach 5) से उड़ान भरती हैं। डीआरडीओ प्रमुख के अनुसार, इन मिसाइलों का परीक्षण उन्नत चरणों में है और इन्हें जल्द ही सेना के बेड़े में शामिल करने की योजना है। यह तकनीक भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगी जिनके पास दुनिया की सबसे तेज और अचूक मिसाइल तकनीक मौजूद है।

The BrahMos Missile System passes through the Rajpath during the 60th Republic Day Parade-2009, in New Delhi on January 26, 2009.

अतीत से भविष्य: ब्रह्मोस-NG  का विकास

अगर हम ब्रह्मोस के सफर को देखें, तो इसकी शुरुआत 290 किमी की रेंज के साथ हुई थी। एमटीसीआर (MTCR) की पाबंदियों के कारण पहले इसकी रेंज सीमित थी, लेकिन भारत के इस समूह में शामिल होने के बाद इसकी रेंज 450 किमी तक बढ़ाई गई। अब डीआरडीओ इसे 800 किमी से 1500 किमी तक ले जाने की दिशा में काम कर रहा है। पुराने संस्करण के मुकाबले नया वेरिएंट न केवल अधिक दूरी तय करेगा, बल्कि इसमें ‘पिन्पॉइंट एक्यूरेसी’ और स्वदेशी ‘सीकर’ तकनीक भी पहले से कहीं अधिक उन्नत होगी।

विशेषज्ञों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

इस खुलासे पर रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की ‘डिटेरेंस’ यानी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगा। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि ब्रह्मोस की बढ़ती रेंज और हाइपरसोनिक क्षमताओं से हिंद महासागर और सीमाओं पर चीन जैसी चुनौतियों से निपटना आसान होगा। पूर्व सैन्य अधिकारियों ने इसे ‘गेम चेंजर’ करार दिया है, जो भविष्य के युद्धों में भारत को रणनीतिक बढ़त दिलाएगा।

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