शक्सगाम घाटी पर भारत का ‘रणघोष’, सेना प्रमुख की चीन को सीधी चेतावनी- ‘हर इंच जमीन हमारी, हम हिफाजत करना जानते हैं’

भारत ने शक्सगाम घाटी पर अपना अटल रुख दोहराया है, जिसमें कहा गया है कि यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर भारतीय क्षेत्र का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान यह स्थिति दोहराई, जो चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के माध्यम से इस क्षेत्र में चीन की बुनियादी ढांचा गतिविधियों की सीधी प्रतिक्रिया थी।

1963 में पाकिस्तान द्वारा चीन को अवैध रूप से सौंपी गई शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) को लेकर भारत का रुख अब बेहद आक्रामक हो गया है। कूटनीतिक मंच पर विदेश मंत्रालय की दो टूक के बाद, अब भारतीय सेना (Indian Army) ने भी चीन को सीधे शब्दों में कड़ी चेतावनी दे दी है।

सेना प्रमुख का बड़ा बयान: ‘हम सरप्राइज देने के लिए तैयार’

कूटनीतिक चेतावनियों के बीच, भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने उत्तरी सीमाओं (Northern Borders) का दौरा करते हुए दुश्मन को साफ संदेश दिया है। उन्होंने बिना लाग-लपेट के कहा:

“शक्सगाम घाटी भारत का अभिन्न हिस्सा है। वहां किसी भी तरह का अवैध निर्माण या सैन्य गतिविधि भारत की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। भारतीय सेना एलएसी (LAC) और उससे परे हर स्थिति पर पैनी नजर रख रही है। हम शांति चाहते हैं, लेकिन अगर किसी ने हमारी सीमाओं की यथास्थिति (Status Quo) बदलने की कोशिश की, तो हमारी सेना ‘सरप्राइज’ देने में देर नहीं लगाएगी।”

सेना प्रमुख का यह बयान साधारण नहीं है। ‘सरप्राइज’ शब्द का रक्षा में गहरा मतलब होता है। इसका अर्थ है कि भारत अब केवल हमले का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर प्रो-एक्टिव (Pro-active) होकर यानी पहले कदम उठाकर दुश्मन के मंसूबों को ध्वस्त कर सकता है।

कूटनीति और शक्ति का डबल अटैक

यह मामला तब और गरमाया जब 9 जनवरी को विदेश मंत्रालय ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत शक्सगाम में चल रहे निर्माण को “अवैध” करार दिया।

  • कूटनीति (Diplomacy): विदेश मंत्रालय ने कहा, “यह जमीन हमारी है, आपकी संधि फर्जी है।”
  • शक्ति (Military Power): सेना प्रमुख ने कहा, “कागज पर जो हमारा है, जमीन पर भी हम उसकी रक्षा करेंगे।”

सियाचिन और शक्सगाम: सुरक्षा का ‘चक्रव्यूह’

शक्सगाम घाटी का मुद्दा इतना संवेदनशील क्यों है? इसे आसान भाषा में समझें। शक्सगाम घाटी भारत के सियाचिन ग्लेशियर (दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र) के ठीक उत्तर में है। अगर चीन यहाँ अपनी पकड़ मजबूत करता है, तो वह सियाचिन में बैठे हमारे जवानों को दो तरफ से घेरने की कोशिश कर सकता है (एक तरफ पाकिस्तान, दूसरी तरफ चीन)। सेना प्रमुख का बयान इसी ‘चक्रव्यूह’ को तोड़ने का ऐलान है।

आधुनिक तकनीक से निगरानी

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सेना अब इस क्षेत्र में केवल दूरबीन से नहीं, बल्कि सैटेलाइट इमेजरी और लॉन्ग-रेंज ड्रोन (Long-range Drones) से शक्सगाम के चप्पे-चप्पे पर नजर रख रही है। चीन की हर सड़क, हर बंकर की जानकारी भारतीय कमांडरों की टेबल पर है।

चीन को समझना होगा- ये 1962 नहीं, 2026 है

चीन को यह समझना होगा कि भारत की चुप्पी उसकी कमजोरी नहीं है। शक्सगाम पर भारत का यह ‘अटल रुख’ और सेना प्रमुख की ‘सीधी चेतावनी’ यह बताती है कि भारत अब अपनी संप्रभुता (Sovereignty) के साथ रत्ती भर भी समझौता नहीं करेगा। यह नया भारत है, जो आंखों में आंखें डालकर बात करना जानता है।

संक्षेप में समझें

शक्सगाम घाटी पर भारत ने आक्रामक रुख अपना लिया है। विदेश मंत्रालय द्वारा चीन-पाक संधि को अवैध बताने के बाद, अब सेना प्रमुख ने चीन को सीधे शब्दों में कड़ी चेतावनी दी है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी अवैध निर्माण का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

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