ग्लोबल डिफेंस डेस्क
जब पूरी दुनिया 2026 के स्वागत में जश्न की तैयारी कर रही है, तब दुनिया की महाशक्तियों के ‘वार-रूम’ में परमाणु कोड चेक किए जा रहे हैं। भू-राजनीति के जानकारों ने चेतावनी दी है कि अगले 48 घंटे आधुनिक इतिहास के सबसे खतरनाक और निर्णायक साबित हो सकते हैं। दुनिया एक साथ पांच मोर्चों पर सुलग रही है और हालात ऐसे हैं कि ट्रिगर कभी भी दब सकता है।
चीन-ताइवान की टेंशन
एशिया में सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जहाँ चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने ताइवान को एक तरह के ‘चक्रव्यूह’ में फंसा लिया है। यह अब महज युद्धाभ्यास नहीं, बल्कि एक ‘एक्टिव नाकाबंदी’ है, जहाँ बीजिंग सिर्फ उस एक पल की ताक में है जब अमेरिका अपनी नज़रें हटाए। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि वाशिंगटन ने ईरान या वेनेजुएला की ओर अपना ध्यान मोड़ा, तो चीन इसका फायदा उठाकर ताइवान पर आखिरी और निर्णायक प्रहार कर सकता है। संदेश बिल्कुल साफ है, अगर अमेरिका ने पलक झपकाई, तो ताइवान नक्शे से ओझल हो सकता है।
क्या अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है ईरान?
उधर मध्य पूर्व का पावरहाउस ईरान अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। तेहरान में मची अंदरूनी कलह और बाहरी दबाव ने वहां तख्तापलट या गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जिससे पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है। ठीक इसी समय, यूरोप में व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ अपनी रणनीति को और आक्रामक करते हुए ‘सीधे गर्दन पर वार’ की नीति अपना ली है। अब रूस का मकसद कीव को बातचीत की मेज पर लाना नहीं, बल्कि उसकी सैन्य क्षमता को जड़ से खत्म करना है, जो बताता है कि यूक्रेन के लिए नया साल बेहद अंधेरे भरा हो सकता है।
वेनेजुएला के साथ अमेरिका का शैडो वॉर शुरू!
तनाव की यह आग सिर्फ यूरोप और एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के अपने ‘बैकयार्ड’ दक्षिण अमेरिका तक पहुंच चुकी है। मीडिया की सुर्खियों से दूर, अमेरिका ने वेनेजुएला में एक ‘शैडो वॉर’ छेड़ दी है, जहाँ उसके हवाई हमलों ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया है। इस आसन्न महायुद्ध की आहट सबसे पहले वित्तीय बाज़ारों ने सुनी है, जिसका प्रमाण जापान के शेयर बाज़ार में आई भारी गिरावट है। इसे अर्थशास्त्री ‘ब्लैक स्वान’ इवेंट मान रहे हैं, जो संकेत दे रहा है कि निवेशक अब युद्धकालीन अर्थव्यवस्था (War Economy) की ओर भाग रहे हैं।
अगले 48 घंटे दुनिया के लिए हैं निर्णायक
कुल मिलाकर, अगले 48 घंटे सिर्फ कैलेंडर का साल नहीं बदलेंगे, बल्कि यह तय करेंगे कि 2026 का सूर्योदय दुनिया के लिए शांति लेकर आएगा या फिर तीसरे विश्व युद्ध का बिगुल। माचिस की तीली जल चुकी है, और दुनिया बारूद के ढेर पर बैठी अपनी किस्मत का फैसला होने का इंतज़ार कर रही है।
